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इस्लाम में दूसरी शादी क्यों जरूरी बताई जाती है? | Hafiz Gulam Sarwar | Shubhankar Mishra Analytics Table

Income Estimates for इस्लाम में दूसरी शादी क्यों जरूरी बताई जाती है? | Hafiz Gulam Sarwar | Shubhankar Mishra

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About इस्लाम में दूसरी शादी क्यों जरूरी बताई जाती है? | Hafiz Gulam Sarwar | Shubhankar Mishra

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दूसरी शादी जरूरी क्यों? इस्लाम में 4 शादियों की इजाजत क्यों? | Shubhankar Mishra Podcast इस्लाम में मर्द को चार शादियों की इजाजत क्यों है, लेकिन औरत एक साथ चार पति क्यों नहीं रख सकती? क्या दूसरी शादी करना जरूरी है? क्या बहुविवाह के पीछे कोई धार्मिक, सामाजिक या व्यावहारिक तर्क है? और अगर पुरुष की जरूरतों के आधार पर दूसरी शादी की बात की जाती है, तो पहली पत्नी की जरूरतों और अधिकारों का क्या? इस खास पॉडकास्ट में शुभांकर मिश्रा ने अपने गेस्ट से इस्लाम में बहुविवाह (Polygamy), दूसरी शादी, महिलाओं की बराबरी, पति-पत्नी के अधिकार और वैध-अवैध संबंधों को लेकर कई सीधे और तीखे सवाल पूछे। बातचीत में गेस्ट ने दूसरी शादी की इजाजत को लेकर अपना नजरिया रखा और उदाहरण देकर समझाने की कोशिश की कि अलग-अलग शहरों में काम करने वाले व्यक्ति के लिए दूसरी शादी को एक विकल्प क्यों माना जाता है। लेकिन शुभांकर मिश्रा ने सवाल उठाया कि अगर पति अलग-अलग शहरों में कई पत्नियां रखता है, तो उन महिलाओं की भावनात्मक और शारीरिक जरूरतों का क्या होगा? क्या शादी के नियमों में पुरुष और महिला के लिए समान अधिकार होने चाहिए? पॉडकास्ट के दूसरे हिस्से में मुसलमानों को किराए पर मकान मिलने में होने वाली परेशानियों, दिल्ली में 'Only Hindu' लिखे किराए के विज्ञापनों, धार्मिक पहचान के आधार पर भेदभाव और हिंदू-मुस्लिम सामाजिक संबंधों पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा मुस्लिम बहुल इलाकों में हिंदू परिवारों की स्थिति, इंडोनेशिया और मलेशिया में धार्मिक समुदायों के सह-अस्तित्व और भारत में सामाजिक सौहार्द जैसे मुद्दों पर भी बातचीत हुई। TIMESTAMPS 00:00 – इस्लाम में मर्द चार शादियां क्यों कर सकता है? 00:09 – अवैध संबंधों और दूसरी शादी पर गेस्ट की दलील 00:23 – शुभांकर मिश्रा की दर्शकों से खास अपील 00:53 – मर्द को चार शादियों की इजाजत, औरत को क्यों नहीं? 01:01 – महिलाओं की दोबारा शादी और बहुविवाह में अंतर 01:15 – आज के जमाने में चार शादियां क्यों? 01:25 – वैध और अवैध संबंधों पर चर्चा 01:39 – अलग-अलग शहरों में काम करने वाले पति का उदाहरण 02:12 – पत्नी से दूर रहने पर दूसरी शादी की जरूरत? 02:29 – दूसरी पत्नी रखने को लेकर गेस्ट का तर्क 02:37 – शुभांकर मिश्रा ने पूछा: पहली पत्नी का क्या? 02:51 – चार पत्नियों की जरूरतों और अधिकारों का सवाल 02:54 – महिलाओं और पुरुषों की शारीरिक जरूरतों पर बहस 03:15 – गेस्ट के वैज्ञानिक दावों पर सवाल 03:31 – महिला और पुरुष के व्यवहार पर तीखी चर्चा 03:47 – क्या महिलाओं की जरूरतें भी बराबर हैं? 03:58 – पति बाकी 25 दिन दूर रहे तो पत्नी क्या करे? 04:02 – कथित रिसर्च पर बहस, फैसला दर्शकों पर 04:09 – रिश्तों में गलती किसकी? पति या पत्नी? 04:24 – धार्मिक व्यक्तियों और आचरण पर चर्चा 04:46 – मुसलमानों को किराए पर घर मिलने में दिक्कत क्यों? 05:02 – नाम देखकर मकान देने से इनकार? 05:09 – किरायेदारों के प्रति डर और सामाजिक धारणाएं 05:31 – दिल्ली के लक्ष्मी नगर की घटना 05:46 – किराए के विज्ञापन पर 'Only Hindu' क्यों लिखा था? 06:03 – केवल हिंदू परिवार को मकान देने की शर्त 06:13 – धार्मिक पहचान के आधार पर भेदभाव का सवाल 06:25 – गेस्ट ने मकान मालिक से क्या बातचीत की? 06:39 – समाज में बढ़ते अविश्वास पर आत्ममंथन 06:55 – भारत की सामाजिक परंपरा और धार्मिक सद्भाव 07:03 – हिंदू-मुस्लिम समुदायों के बीच पुराने विश्वास की मिसाल 07:40 – हिंदू मोहल्लों में मुस्लिम परिवारों के रहने का अनुभव 07:59 – मुस्लिम बहुल इलाकों में हिंदू परिवारों की स्थिति पर सवाल 08:15 – इंडोनेशिया और मलेशिया में हिंदू समुदाय 08:28 – मुस्लिम बहुल देशों में धार्मिक परंपराओं पर चर्चा 08:44 – खाड़ी देशों में हिंदुओं की स्थिति पर गेस्ट की राय 09:02 – दिल्ली के ओखला में हिंदू दुकानदार और मुस्लिम ग्राहक आपकी राय क्या है? क्या दूसरी शादी के लिए धार्मिक इजाजत और व्यक्तिगत जरूरतों को पर्याप्त आधार माना जा सकता है? क्या पति-पत्नी दोनों के अधिकार और जिम्मेदारियां बराबर होनी चाहिए? और क्या भारत में किसी व्यक्ति को उसके धर्म या नाम के आधार पर किराए का घर देने से मना करना उचित है? अपनी राय COMMENT SECTION में जरूर बताएं। ऐसे ही बेबाक पॉडकास्ट, सामाजिक मुद्दों पर चर्चा और खास इंटरव्यू देखने के लिए Unplugged Shubhankar को SUBSCRIBE करें। LIKE | SHARE | COMMENT | SUBSCRIBE Disclaimer: इस पॉडकास्ट में व्यक्त धार्मिक व्याख्याएं, व्यक्तिगत विचार और सामाजिक विश्लेषण संबंधित गेस्ट के अपने विचार हैं। महिला-पुरुष की शारीरिक जरूरतों और व्यवहार के संबंध में किए गए वैज्ञानिक दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है। किसी धर्म या समुदाय के सभी लोगों के विचार या व्यवहार को इन बयानों के आधार पर नहीं समझा जाना चाहिए। NEWSBOOK का उद्देश्य विभिन्न दृष्टिकोणों पर चर्चा प्रस्तुत करना है। #SecondMarriage #Islam #Polygamy #FourWives #MuslimMarriage #WomenRights #ShubhankarMishra #Newsbook #IslamicMarriage #HinduMuslim #ReligiousDebate #HindiPodcast

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