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सरकारी बैंक बिहार के बर्बादी का सबसे बड़ा कारण Analytics Table
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About सरकारी बैंक बिहार के बर्बादी का सबसे बड़ा कारण
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#सरकारी_बैंकों के #कर्मचारी ग्राहकों को सबसे ज्यादा #परेशान करते हैं। बैंक में कोई भी काम कराना हो तो यहां के कर्मचारी सीधी मुंह इसलिए बात नहीं करते ताकि आप #दलाल के थ्रू जब आएंगे तो कुछ #घुस देकर जाएंगे। बैंकों के चारों तरफ सीसीटीवी लगा रहता है फिर भी बिहार में सबसे ज्यादा #मोटरसाइकिल चोरी बैंक के सामने से ही होता है। सीसीटीवी लगा होने के बावजूद भी पॉकेटमारी की घटना सबसे ज्यादा बैंक और बैंक के आसपास घटती है। पैसा #लूटपाट की घटना भी सबसे ज्यादा बैंक के आसपास ही घटती है। #यहां सोचने वाली सबसे बड़ी बात यह है कि बैंक बाजार में होता है। बैंकों में सीसीटीवी लगा रहता है उसके अलावा बाजार के अनेकों दुकान में आजकल सीसीटीवी लगा रहता है। फिर भी चोर और पॉकेट मार नहीं पकड़े जाते हैं इसके पीछे सबसे बड़ा रीजन यह है कहीं नहीं तो कहीं इसमें बैंक के कुछ भ्रष्ट लोगों की भी संलिप्तता होती है। #बिहार के सरकारी बैंक में कोई भी रसूखदार आदमी जाता है तो उसका काम बड़े आराम से हो जाता है लेकिन एक गरीब अगर ₹2000 निकालने जाता है तो उसे वहां से भगा दिया जाता है इसका जीता जागता उदाहरण मिर्जापुर के निवासी मदन हाजरा है जो अपने बच्चे इलाज के लिए पैसा निकालने भारतीय स्टेट बैंक के एक शाखा पारस पकड़ी में गए थे। #बैंक के बड़े कर्मचारियों से मिलकर फर्जी कागज बनाकर बड़े लोग करोड़ों रुपया का लोन आसानी से करा ले रहे हैं पर पारस पकड़ी निवासी विकास गुप्ता जिनका मिठाई का दुकान इस बैंक के सामने हैं। बैंक के अनेकों कर्मचारी तथा पिछला मैनेजर साहब का खाना फ्री में इनके दुकान से होता था चाय पानी नाश्ता और मिठाई की तो बात ही अलग है। इसके अलावा और 38 हजार के आसपास इनका खर्च भी हो चुका है। इनको सिर्फ 3 लाख का सीसी कराना था सारा कागज़ दो बार तैयार करने के बावजूद इनका काम नहीं हुआ। #यह तो सिर्फ दो लोगों की बात है यही कहानी बिहार के हर एक आम आदमी के साथ सरकारी बैंक के कर्मचारी दोहराते हैं। निजीकरण का मैं कहीं भी समर्थन नहीं करता हूं लेकिन ऐसी स्थिति देखने के बाद लगता है निजीकरण ठीक ही हो रहा है। Sach Tak News
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